‘हिंदू समाज’ को ‘जाति-वर्ग’ में ‘बांटने’ का ‘षड्यंत्र’ हो ‘रहा’

‘हिंदू समाज’ को ‘जाति-वर्ग’ में ‘बांटने’ का ‘षड्यंत्र’ हो ‘रहा’

‘हिंदू समाज’ को ‘जाति-वर्ग’ में ‘बांटने’ का ‘षड्यंत्र’ हो ‘रहा’

बनकटी/बस्ती। ’बनकटी’ आदर्श नगर पंचायत बनकटी में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों, संतों और प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया। वक्ताओं ने हिंदू समाज को संगठित होने और विभिन्न षड्यंत्रों से सावधान रहने का आह्वान किया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूक करना और देश के समक्ष मौजूद वर्तमान चुनौतियों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सनातन संस्कृति सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य गोविन्द जी हिंदू राष्ट्र की संकल्पना पर बल देते हुए कहा कि संघ के निरंतर प्रयासों और हिंदू समाज की एकजुटता से भारत पुनः हिंदू राष्ट्र बनकर विश्व गुरु के पद पर आसीन होगा। धर्म पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि सनातन का मूल अर्थ ही विश्व बंधुत्व और सर्वे भवन्तु सुखिनःश् है। यह धर्म पूरे विश्व को शांति का संदेश देता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि जिसने भी सनातन को चुनौती दी, उसे इसका उत्तर मिला। सांप्रदायिकता के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि हिंदुत्व सांप्रदायिक नहीं है, बल्कि सांप्रदायिक वे हैं जो इसी देश में रहकर इसके साथ गद्दारी करते हैं। पूर्व खंड संघचालक बनकटी के परमात्मा पान्डेय ने मजहबी भाषा और काफिर जैसे शब्दों के पीछे छिपे मंतव्यों को समझने की आवश्यकता बताते हुए बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति का उल्लेख करते हुए हिंदू समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। उन्होंने संघ को जीवन जीने की शैली बताते हुए इसे सामाजिक समरसता और ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक कहा। समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय नारी का त्याग, तप और कर्तव्यपरायणता अद्वितीय है। परिवार और समाज को धर्म के प्रति जागरूक करने में मातृशक्ति की भी भूमिका निर्णायक है। वही  भारत की बढ़ती शक्ति की ओर संकेत करते हुए चंद्रयान और मंगलयान की सफलता को देश की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने चेताया कि कुछ बाहरी शक्तियां भारत की अखंडता को तोड़ने और हिंदू समाज को जाति-वर्ग में बांटने का षड्यंत्र रच रही हैं, जिससे सभी सनातनियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध गायक अमरेश पान्डेय व विजय मोदनवाल की प्रस्तुति रही।जेकरा राम न बिगडिहै ओकर लोग का बिगाड, प्रेम चिन्हे ला नाई कवन जात हैष् ष्देश क बच्चा-बच्चा बीर जवान चाहत बा दिल दिया है जान भी देगें ए वतन तेरे लिए ष् जैसे भजनों व राष्ट्रीय गीत पर पूरा पंडाल जयघोष से गूंज उठा। उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सम्मेलन की अध्यक्षता बाबा अमरजीत दास हनुमान गढ़ी ने व संचालन आचार्य जानकी प्रसाद ने किया।आयोजकों द्वारा सभा में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य सुरेन्द्र तिवारी, राजेश पाल, आनन्द शुक्ल, दुर्गेश शुक्ल, अजीत शुक्ल,सी०बी०शुक्ल, सुग्रीव पाल, अंकित पान्डेय,रोहित दूबे, रवि चन्द्र पान्डेय, बबलू दूबे, राम किशुन चौधरी, बीरनारायण चौधरी, ब्रम्हानन्द शुक्ल, शिवशंकर मिश्र, राधेरमण विश्वकर्मा, गोपाल पान्डेय, रामतेज पाल, नन्देश्वर, अतुल पाल, बिष्णु कुमार पाल, मुरलीधर शुक्ल, संचिदानन्द, सन्तोष शुक्ल, बीरेन्द्र बहादुर पाल, राजकुमार मिश्र, बिजय शंकर पान्डेय, सुनील पाल के साथ भारी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

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