आखिर किस ‘मां-बाप’ ने ‘मंडल’ के ‘5.11’ लाख ‘वोटर्स’ को जन्म ‘दिया’?
- Posted By: Tejyug News LIVE
- उत्तर प्रदेश
- Updated: 23 December, 2025 19:43
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आखिर किस ‘मां-बाप’ ने ‘मंडल’ के ‘5.11’ लाख ‘वोटर्स’ को जन्म ‘दिया’?
-सबसे अधिक सिद्धार्थनगर में 4.2 लाख, बस्ती में 3.01 लाख एवं संतकबीरनगर में 88 हजार
- -52 लाख वोटर्स में से 5.11 लाख यानि 28.35 फीसद के मां-बाप कहां हैं, इसकी जानकारी वोटर्स बने बच्चे नहीं दे पाए
- -मंडल में 9.75 लाख फर्जी वोटर्स का कटने से सभी दलों में हलचल मची हुई, सबसे अधिक सिद्धार्थनगर में 4.2 लाख यानि 20.53 फीसद, बस्ती में 3.01 लाख यानि 15.86 फीसद और संतकबीरनगर में 2.71 लाख यानि 20.31 फीसद फर्जी वोटर्स पिछले कई चुनाव से प्रत्याशियों को हराने और जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहें
- -30 दिसंबर को सूची के अनंतिम प्रकाशन के बाद जो बिना मां-बाप के वोटर्स बने हैं, पहले उन्हें नोटिस दिया जाएगा, उसके बाद मां-बाप को तलाशने के लिए अधिकारियों की फौज लगाई जाएगी
- -बस्ती में अगर तीन लाख कटे हैं, तो 29054 मतदाता बढ़े भी, इनमें सबसे अधिक 6561 बस्ती सदर में, रुधौली में 5928, हर्रैया में 5894, कप्तानगंज में 5359 एवं सबसे कम महादेवा में 5312, अभी और नये मतदाता बढ़ सकते
- -हैरान करने वाली बात यह है, कि 1830 मतदाताओं ने एसआईआर का फार्म तो भरा, लेकिन फॅार्म पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, फार्म ही जमा नहीं किया, इनमें सबसे अधिक 594 महादेवा में, 487 रुधौली में, 441 बस्ती सदर में, 182 कप्तानगंज में और कप्तानगंज में सबसे कम 126
बस्ती। एसआईआर का जो सबसे बड़ा सच सामने आया, वह है, बड़े पैमाने पर बिना मां-बाप के वोटर्स बनना, सवाल उठ रहा है, कि जब मां-बाप ही नहीं हैं, तो किसने मंडल के पांच लाख 11 हजार से अधिक वोटर्स को जन्म दिया। आखिर इतनी बड़ी संख्या में वोटर्स बने तो कैसे बने? किसने बनाया? और बनाने के पीछे मकसद क्या रहा? यह सवाल न सिर्फ मंडल के लोगों को हैरान कर रहा है, बल्कि चुनाव आयोग भी हैरान है। अगर जनपद सिद्धार्थनगर में 19.61 लाख मतदाताओं में से 4.02 लाख यानि 20.53 फीसद वोटर्स, बस्ती में 19 लाख में से 3.01 लाख यानि 15.86 फीसद और संतकबीरनगर में 13.37 लाख वोटर्स में से 2.71 लाख यानि 20.31 फीसद बन गए, तो इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार? जिस मंडल में 28.35 फीसद ऐसे मतदाता हों, जिनके माता-पिता का कोई पता नहीं, और अगर यह सभी पिछले चुनाव में मतदान करते आ रहे हो, चुनाव और मतदाता सूची का भगवान ही मालिक। यह एक ऐसा सच है, जिसे इस लिए पार्टिया झूठ साबित नहीं कर सकती क्यों कि यह सब रिकार्ड में है। बिना मां-बाप के बने 5.11 लाख वोटर्स, बीएलओ को यह नहीं बता पाए कि वह कैसे बिना मां-बप के वोटर्स बन गए? फिलहाल, 30 दिसंबर को सूची के अनंतिम प्रकाशन के बाद जो बिना मां-बाप के वोटर्स बने हैं, पहले उन्हें नोटिस दिया जाएगा, उनके जबाव के अनुसार मां-बाप को तलाशने के लिए अधिकारियों की फौज लगाई जाएगी, हर विधानसभा क्षेत्र में 20-20 अधिकारियों की फौज मां-बाप को तलाशंगें के लिए लगाए जाने की योजना।
मंडल में 9.75 लाख फर्जी वोटर्स के कटने से सभी दलों में हलचल मची हुई, सबसे अधिक सिद्धार्थनगर में 4.2 लाख यानि 20.53 फीसद, बस्ती में 3.01 लाख यानि 15.86 फीसद और संतकबीरनगर में 2.71 लाख यानि 20.31 फीसद, यह फर्जी वोटर्स पिछले कई चुनाव से प्रत्याषियों को हराने और जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहें है। इसे नेताओं की उपज भी माना जा रहा है। बस्ती में अगर तीन लाख वोट कटे हैं, तो 29054 मतदाता बढ़े भी, इनमें सबसे अधिक 6561 बस्ती सदर में, रुधौली में 5928, हर्रैया में 5894, कप्तानगंज में 5359 एवं सबसे कम महादेवा में 5312, अभी और नये मतदाता बढ़ सकते। हैरान करने वाली बात यह है, कि 1830 मतदाताओं ने एसआईआर का फार्म तो भरा, लेकिन फॅार्म पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, फार्म ही जमा नहीं किया, फार्म न जमा करने और हस्ताक्षर करने का कोई कारण भी इन लोगों ने बीएलओ को नहीं बताया। इनमें सबसे अधिक 594 महादेवा में, 487 रुधौली में, 441 बस्ती सदर में, 182 कप्तानगंज में और कप्तानगंज में सबसे कम 126 है।
इससे पहले मंडल में कुल 52 लाख मतदाता मतदान करते थे, लेकिन एसआईआर के बाद अब 42.25 लाख मतदाता ही मतदान कर पाएगें। यानि एसआईआर ने 9.75 लाख फर्जी मतदाताओं को बाहर का रास्ता दिया। इसका प्रभाव जनसंख्या के आकड़े पर भी पड़ेगा। कम से कम बस्ती मंडल में 9.75 लाख जनसंख्या तो कम हो ही जाएगी, इसी तरह अगर देखा जाए तो पूरे प्रदेश में चार करोड़ से अधिक की जनसंख्या कम हो जाएगी। अब आप लोग एसआईआर के महत्व और उसी उपयोगिता को समझ गएं होगें। एसआईआर के मामले में जिले का 10वां स्थान है। एसआईआर से एक और उपलब्धि सामने आया।

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