आखिर ‘भाजपा’ के ‘करोड़ों’ वोट काटे ‘किसने’?
- Posted By: Tejyug News LIVE
- उत्तर प्रदेश
- Updated: 20 December, 2025 03:45
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आखिर ‘भाजपा’ के ‘करोड़ों’ वोट काटे ‘किसने’?
- -सरकार भाजपा की मुख्यमंत्री भाजपा के कमिष्नर, डीएम और बीएलओ सरकार के फिर भाजपा के कट गए लगभग चार करोड़ वोटर्स
- -अगर योगीजी की बात को सच मान लिया जाए तो इसका मतलब एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह ईमानदारी से निभाई गई, क्यों कि एसआईआर से तो सबसे अधिक नुकसान बीजेपी को हुआ
- -ऐसे में अगर सपा और कांग्रेस वाले यह कहते हैं, कि यह एसआईआर उनके वोटर्स का नाम काटने के लिए कराया जा रहा
- -अगर योगीजी को लगता है, कि उनके सरकारी अमले ने भाजपा के वोट पर कैंची चलाई तो, क्यों नहीं कोई कार्रवाई हुई, हो सकता है, कि कार्रवाई एसआईआर के बाद हो, एसआईआर का भय काम कर गया
बस्ती। अगर भाजपा का कोई मुख्यमंत्री सार्वजनिक रुप से यह कहे, कि एसआईआर के चलते लगभग चार करोड़ में से 80-90 फीसदी वोट भाजपा का कटा तो बहुत बड़ी बात है, अगर योगीजी जैसा सीएम कहते हैं, तो यह माना जाता है, कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निभाई गई, नहीं तो किसी भी डीएम की इतनी हिम्मत नही की वह भाजपा के वोटर्स का नाम मतदाता सूची से कटवा दें। सवाल यह भी उठ रहा कि सरकार भाजपा की सीएम भाजपा के अधिकारी और बीएलओ भाजपा के माने जाते हैं, तो कैसे भाजपा के करोड़ों वोटर्स का नाम कट गया? सपा और कांग्रेस जिस तरह संसद से लेकर सड़क तक एसआईआर का यह कहकर विरोध कर रहे हैं, कि यह एसआईआर सिर्फ हम लोगों के वोटर्स का नाम काटने के लिए कराया जा रहा, में कितनी सच्चाई हैं, इसका पता यूपी के मुख्यमंत्री के बयान से चलता है। देखा जाए तो इस एसआईआर से सबसे अधिक नुकसान यूपी में भाजपा को हुआ, और इसका प्रभाव 2027 में दिखाई भी पड़ सकता है। एक भी पार्टी के नेता ने अभी तक योगीजी के उस बयान का विरोध नहीं किया, जिसमें योगीजी ने कहा है, कि एसआईआर से सबसे अधिक नुकसान भाजपा को हुआ, क्यों कि काटे गए चार करोड़ वोटर्स में 80 से 90 फीसद वोटर्स भाजपा के रहे। जिस तरह एसआईआर से पहले प्रदेश में यह हौवा खड़ा किया गया, कि एसआईआर के जरिए भाजपा, विरोधी पार्टियों का वोट काटने की साजिश कर रही है। सवाल उठ रहा है, कि जिले में कांग्रेस को छोड़कर सपा ने प्रत्येक बूथ पर अपने लोगों को बीएलओ के साथ लगा रखा था तो कैसे उनके लोगों का वोट कटा? अब सवाल उठ रहा है, कि योगीजी भाजपा का करोड़ों वोट काटने वाले डीएम और बीएलओ को कौन सी सजा देगें? पुरस्कार देगें या फिर दंड, इसका पता एसआईआर के बाद ही चलेगा। यह भी सही है, कि योगीजी 75 जिलों के डीएम के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते? क्यों कि सभी जिलों में फर्जी वोट काटे गए, अब भाजपा का वोट किस जिले में सबसे अधिक काटे गए, यह किसी को भी पता नहीं चल सकता, क्यों कि यह कोई सरकारी आकड़ा नहीं हैं, बल्कि बयानबाजी है। खास बात यह है, कि इतनी बड़ी संख्या फर्जी वोट कटे। इसका फायदा और नुकसान किस पार्टी को होगा वह अलग बात है। यही वोट 2027 के चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है, बकौल योगीजी इससे नुकसान तो भाजपा को ही सबसे अधिक होगा। एक सवाल यह भी उठ रहा है, कि क्या भाजपा को यह नहीं मालूम था, कि एसआईआर से यूपी में सबसे अधिक नुकसान उनकी पार्टी को ही होगा, इससे पता चलता है, कि एसआईआर करवाने का निर्णय भाजपा का नहीं बल्कि निर्वाचन आयोग का है। एसआईआर कितना जरुरी था, इसका एहसास जिले के लोगों को उस समय हुआ, जब उन्हें पता चला कि उनके जिले में तीन लाख से अधिक फर्जी वोटर्स का नाम काटा गया, इन तीन लाख में से यह कोई भी पार्टी नहीं कह सकती है, उसका कितना वोट कटा, कहने को तो योगीजी भी कहते हैं, लेकिन उन्हें भी अच्छी तरह मालूम नहीं होगा कि उनका कितना कटा और विरोधी का कितना कटा। चूंकि यह कोई सरकारी आकड़ा नहीं हैं, इस लिए इसे सही नहीं कहा जा सकता है। बयानबाजी जो भी कर ले, लेकिन सच तो यही है, तीन लाख फर्जी वोट जिले में काटे गए। यह सच किसी के बयान से झूठा साबित नहीं हो सकता है, क्यों कि यह सरकारी आकड़ा है।

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