‘मोदूजी’ ‘हजार-दो हजार’ के ‘बुके’ पर ‘टिकट’ नहीं ‘मिलता’!

‘मोदूजी’ ‘हजार-दो हजार’ के ‘बुके’ पर ‘टिकट’ नहीं ‘मिलता’!

‘मोदूजी’ ‘हजार-दो हजार’ के ‘बुके’ पर ‘टिकट’ नहीं ‘मिलता’!

बस्ती। सोशल मीडिया पर एक फोटो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें मोदू चौधरी की पत्नी सुषमा चौधरी का भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को बुके देते हुए नव वर्ष की बधाई दी गई। पत्रकार ने इन्हें सदर विधानसभा क्षेत्र का भावी प्रत्याशी बताते हुए महिमा मंडित किया। पत्रकार ने भावी प्रत्याशी से यह नहीं पूछा कि आप चुनाव लड़ने जा रही है, आखिर आप का जनधार क्या है? क्यों कि आपने आज तक एक भी चुनाव नहीं लड़ा तो भाजपा जैसी पार्टी क्यों आप को टिकट देगी? सच तो यह है, कि यह एक घरेलू महिला है, और इनकी पहचान मोदू चौधरी की पत्नी के रुप में है। जनता ऐसे लोगों के बारे में कहती और सलाह देती है, कि जाइए पहले भाजपा के लिए पसीना बहाइए, चुनाव लड़िए और जीतिए, फिर भावी प्रत्याशी बनिए। यह भाजपा हैं, यहां पर न जाने कितने कार्यकर्त्ता दरी बिछाते-बिछाते जवान से बूढ़े हो गए, लेकिन उन्हें आजतक वह सम्मान और पद नहीं मिला, जिसके वह असली हकदार रहे। अगर भाजपा में ऐसे लोगों को सम्मान नहीं मिला तो हजार दो हजार के बुके पर कैसे मिलेगा? ऐसे मौके पर पत्रकारों को भी सलाह दी जा रही है, वह कम से कम ऐसे लोगों से सवाल जबाव अवष्य करें। नहीं करेगें और किसी खास की बाते लिखेगें तो सवाल आप भी डठेगा। चुनाव आने वाला हैं, इस तरह के ना जाने कितने भावी प्रत्याशियों से आप लोगों का वास्ता पड़ेगा। पत्रकारों को ऐसे मौके पर सवाल करना भी सीखना चाहिए। ऐसी महिला क्या संगठन को मजबूत करेगी, जो कभी बैठकों में ही न गई हो।

मोदूजी को भी सलाह दी जा रही है, कि किसी के झांसे में आकर मेहनत की कमाई को न लुटाए, जिले में न जाने कितने इनके हमदर्द होगें जो सजातीय होने के कारण आप की पत्नी को टिकट दिलाने का अभी से दंभ भरते होंगे, जब कि ऐसे लोगों के टिकट का ही कोई भरोसा नहीं। यह भी ध्यान देना होगा कि आप की पत्नी को इस लिए कोई टिकट नहीं दिला सकता है, क्यों आपकी पत्नी के साथ चौधरी लगा हुआ। अगर टिकट मिलने की गांरटी चौधरी है, तो भूल जाइए। कोई भी प्रदेश अध्यक्ष अपने उपर यह दाग नहीं लगा सकता, कि उसने सजातीय होने के नाते किसी को टिकट दिया। पंकज चौधरीजी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं, कि उन्हीं लोगों को ही टिकट मिलेगा, जो जीतने लायक होगेें। देखा जाए तो दिन भर में पंकज चौधरी को ना जाने कितने लोग बुके देकर आते हैं, और बाहर आकर अपने आप को भावी प्रत्याशी बताते है। परिचित पत्रकार फोटो के साथ मिलकर महिमां मंडित भी करवाते। जो लोग चौधरी का नेता और पंकजजी का करीबी बताकर टिकट दिलाने का झांसा देते हैं, उनसे सवाधान रहने की आवष्यकता है। नहीं तो करोड़ों जाएगा ही, इज्जत भी चली जाएगी। इस लिए इज्जत और मेहनत की कमाई को बेकार होने से बचाना हैं, चौधरियों के ठेकेदारों से बचना होगा। यह भी सही है, कि अगर पंकज चौधरी की बदनामी होती है, तो उन लोगों के कारण होगी, जो पंकजजी को अपना अतिकरीबी बताते हुए नहीं थकते। यह भी सही है, भले ही पंकजजी के पास संगठन चलाने का कोई खास अनुभव न हो। लेकिन वह एक मझे हुए राजनीति के खिलाड़ी अवष्य है। टिकट वितरण में यही उनका तुरुप पत्ता साबित होगा। सबसे दयनीय स्थित उन लोगों की होगी, जो लोग इनके नाम पर तिजोरी भरने का प्रयास करेगें। इस लिए एक बार फिर मोदू चौधरी जैसे टिकट के व्याकुल धन्ना सेठों को बस्ती के चौधरी के ठेकेदारों से बचने की सलाह दी जा रही। सलाह मान लीजिए नही ंतो रोना पड़ेगा।

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