केस’ दर्ज ‘करने’ को ‘सूद’ पर लिया ‘छह हजार’

केस’ दर्ज ‘करने’ को ‘सूद’ पर लिया ‘छह हजार’

केस’ दर्ज ‘करने’ को ‘सूद’ पर लिया ‘छह हजार’

बनकटी/बस्ती। अगर किसी घायल परिवार को मुकदमा दर्ज कराने के सूद पर पैसा लेना पड़े तो आप समझ सकते है, कि जिले में भ्रष्टाचार किस सीमा तक पहुंच चुका है। एक सप्ताह पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने योगीजी से कहा था, कि योगीजी जाकर देखिए आप के राज में पीड़ित परिवार का मुकदमा तब लिखा जाता है, जब वह पैसा नहीं दे देता। योगीजी के जीरो टालेंरस नीति पर कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि अगर आप के जीरो टालरेंस नीति की यह हालत है, तो आपको समीक्षा करनी चाहिए। माता प्रसाद पांडेयजी की कही हुई बातों को मुंडेरवा पुलिस ने चरित्रार्थ कर दिया। यहां के परिवार का केस तब दर्ज हुआ, जब उसने छह हजार दिया, हैरान करने वाली बात यह है, कि यह पैसा उसने 10 फीसद सूद पर लेकर पुलिस को दिया। अगर इसी को सुषासन कहते हैं, तो फिर सुशासन को क्या कहते है? मामला मुन्डेरवा थाना क्षेत्र के मदरा उर्फ बाघापार गांव का है। निवासी पूरा विपन्न परिवार एक विशेष समुदाय द्वारा मार खाने की वजह से जिंदगी-मौत से जूझ रहा हैं। इस परिवार का सुनने वाला कोई नहीं। यह घटना 25 दिसंबर सायं 5 बजे का बताया गया। एक प्राइमरी स्कूल है, जिसमें कुछ बच्चे गेंद खेल रहे थे। गेंद बगल में रहने वाले रामबरन के घर में पहुँच गया। जहां उनकी लड़की बन्दनी स्नान कर रही थी। गेंद लेने बच्चे पहुंचे तो बंदनी बोली अभी मैं स्नान कर रही हूं। यहां मत आना स्नान करने के बाद गेंद दे दूंगी। जिस पर कुछ बच्चे झगड़ा करते हुए अंदर प्रवेश कर गए थे। जिसे लेकर बच्चों को घर की दादी डांट दी थी, जिस पर लाल बहादुर की पत्नी अपने बच्चों को डांट-फटकार कर अपने घर लेकर चली गई। नन्दनी के घर पर एक समुदाय गाली-गुप्ता करता रहा। गाली गुप्ता देने की वजह से नन्दनी के परिवार वालों से कुछ कहासुनी हो गई थी। मामला शांत हो गया था। परिवार की माली स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं है। पिता राम बरन का दोनों पैर का कुल्हा पहले से ही टूट चुका, चलने फिरने में असमर्थ है। बीमार रहने की वजह से नंदिनी का एकलौता भाई जितेंद्र ठेला पर चाट की दुकान लगाता है। जब अपनी रोजी-रोटी में दुकान लगाने के लिए बघाडी चौराहे पर जा रहा था तो बीच रास्ते में एक समुदाय के नूरसलीम, अफसाना खातून, मुस्तफा, गुड़िया खातून, सीमा खातून, आसतरून निशा आदि लोग गोलबंद होकर आए और लाठी डंडे लात घूँसों व मोटर साइकिल की चेन से पटक कर मारने लगे। जिस पर पडोस की रहने वाली महिलाओं ने गुहार लगाना शुरू किया। गुहार सुनकर नन्दनी पहुचीं और अपने भाई के ऊपर लेट गयी। दरिदों ने उसे भी मार करके लहुलुहान कर दिया। दोनों हाथ टूट गया है, रीड की हड्डी काम नहीं कर रही है। मां ठकुरा देवी का सिर इस प्रकार फटा हुआ था, कि डाक्टर ने टांका लगाने से ही मना कर दिया। जितेंद्र के सिर में आठ टांका लगा। पूरे परिवार में सभी को गंभीर चोटे आई हैं। मामला थाने पर पहुंचा लेकिन गाँव के चौकीदार इबराहीम की मिलीभगत से मुकदमा पंजीकृत नहीं हुआ। तीसरे दिन जब सूद पर लेकर 6000 पहुंचे, तब जाकर मामूली धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर हुआ। आरोप है कि जितने मुलजिमान है, उन सब का नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किया गया है। थाने के कोई दीवानजी हैं जिनका मोबाइल नंबर 9935814629 है। कहे तुम्हारे कहने के हिसाब से मुकदमा नहीं लिखा जाएगा जो लिखवा रहा हूं वही लिखा जाएगा। लिखवाना हो तो लिखवा लो नहीं तो तहरीर फाड़ कर फेंक दूंगा, जहां जाना है जाओ। विपन्न परिवार मुख्यमंत्री से भी न्याय की गुहार लगाई है। वहीं दूसरे पक्ष ने बताया कि यह लोग शराब पीकर आपस में ही मार पीट किए हैं। वही गांव वालों ने बताया उनके घर का कोई शराब नहीं पीता है।

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