‘जाते-जाते’ तुमने कैसा ‘देश’ का हाल ‘बनाया’

‘जाते-जाते’ तुमने कैसा ‘देश’ का हाल ‘बनाया’

‘जाते-जाते’ तुमने कैसा ‘देश’ का हाल ‘बनाया’

बस्ती। कवि साहित्यकार और डाक्टर वीके वर्मा ने बीते साल की बिदाई और नए साल का आगमन पर कविता के जरिए संदेष दिया है। जब जाना तय है तो जाओ, पर जाते क्षण भी हरशाओ, एक साल में जाना ही था, मत आँखों में आँसू लाओ। कभी हँसाया कभी रुलाया। अपना हर जलवा दिखलाया, लेकिन जाते-जाते तुमने कैसा देश का हाल बनाया। सन् पच्चीस की शाम सुहानी, आज लग रही कैसी ज्ञानी। जाते वक्त संदेशा देती, करो सुबह की तुम अगुवानी। नया वर्ष जो आयेगा, तुमको सुख पहुँचायेगा। नफरत की दीवार ढहाकर गीत प्रेम का गायेगा। तुम पर था संसार फिदा, तुमसे होता आज जुदा। सन् पच्चीस अति हर्षित मन से, तुमको करता आज विदा। नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ! यह नया साल आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ, सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए, आपके सभी सपने पूरे हों, और हर दिन नई ऊर्जा व उत्साह से भरा रहे। आपको और आपके परिवार को नव वर्ष 2026 की ढेर सारी बधाई । नये वर्ष की बेला आयी। उर में नई चेतना लायी। कैसा लगता सुखद प्रभात। खुशियों की होती बरसात। वर्मा हुआ तिमिर का नाश। सबके अधरों पर उल्लास। नया वर्ष हर व्यथा हरे। हर मानव को सुखी करे। लाये सबके उर में हर्ष। सुख, समृद्धि लाये यह वर्ष। बरसे सदा प्रेम का छंद। रहे सभी प्राणी सानन्द। नये वर्ष पर मेरे भाई। ‘वर्मा’ देता तुम्हें बधाई।

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