‘फर्जी’ वोटर्स के ‘कटने’ से बढ़ी ‘प्रधानों’ में ‘बेचैनी’
- Posted By: Tejyug News LIVE
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- Updated: 14 January, 2026 20:10
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‘फर्जी’ वोटर्स के ‘कटने’ से बढ़ी ‘प्रधानों’ में ‘बेचैनी’
बस्ती। जिन असली/नकली प्रधानों ने फर्जी वोटर्स के सहारे चुनाव जीतने की रणनीति बनाई, उनकी रणनीति फेल होने वाली है। फर्जीवाड़ा करने वाले प्रधानों ने साढ़े छह लाख से अधिक फर्जी मतदाता बना डाले। एक अनुमान के अनुसार फर्जी वोट बनाने के लिए चुनाव जीतने वाले प्रधानों ने बीएलओ और तहसीलों पर लगभग 20 करोड़ खर्च किया। प्रधानों ने यह पैसा जमीन और घर बेचकर नहीं लगाया, बल्कि मनरेगा और ग्राम निधि से कमाए गए, धन को खर्च किया। एक तरह से यह लोग गांव बेचकर इस लिए फर्जी वोट बनाए, ताकि अगली बार फिर गांव को बेचा जा सके। गांव बेचकर असली/नकली प्रधानों ने तो पैसा खूब कमाया, लेकिन इज्जत गंवाया। 1226 में से शायद ही कोई ग्राम पंचायत होगा, जहां के प्रधानों ने वाकई मुखिया जैसी भूमिका निभाया हो। इसके लिए काफी हद तक क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों और असली/नकली ब्लॉक प्रधान संघ के अध्यक्षों को जिम्मेदार माना जा रहा है। न प्रधान आईडिएल बन सके और न प्रधान। रही बात असली/नकली प्रधान संघ के अध्यक्षों की तो इनका जिन प्रमुखों से नहीं बना, उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिन अध्यक्षों ने आवाज उठाया, वह आवाज अधिक दिन तक नहीं सुनाई दी। प्रधानों ने तो क्षेत्र पंचायतों के खिलाफ एकाध बार आवाज भी उठाया, लेकिन बीडीसी ने तो मानो पांच साल तक मौन ही रहें। हम बात कर रहे थे, फर्जी वोटर्स की। निर्वाचन आयोग और प्रशासन तो चाह रहा है, कि पंचायत चुनाव एसआईआर मतदाता सूची से हो। निर्वाचन आयोग पूरी तरह चाहता है, कि विधानसभा और पंचायत मतदाताओं के बीच जो लगभग साढ़े छह लाख वोटर्स का अंतर हैं, उसे किसी तरह समाप्त किया जाए। इसी लिए बार-बार मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन की तिथि बढ़ाई जा रही है। जानकारों का दावा है, कि निर्वाचन आयोग और प्रशासन भले ही चाहें जितना भारी अंतर को समाप्त करने का प्रयास कर ले, लेकिन 30 फीसद का अंतर तो रहेगा ही, यानि साढ़े चार लाख वोटांे का अंतर रहेगा, यानि साढ़े चार लाख फर्जी वोट होगा ही। इसकी असली तष्वीर छह मार्च और 28 मार्च को सामने आएगा। जब छह मार्च को एसआईआर और 28 मार्च को पंचायत के मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। निर्वाचन आयोग भी उसी समय निर्णय लेगा कि पंचायत चुनाव किस मतदाता सूची के आधार पर कराया जाए। चुनाव अप्रैल और मई 26 में निर्धारित है। इसी लिए एसआईआर में बढ़ाने और पंचायत में मतदाताओं को घटाने का काम एक साथ पूरे जिले में हो रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि इसमें फर्जीवाड़ा करने वाले कितने प्रधान अपने मकसद में सफल होते है। चुनाव चाहें विधानसभा/लोकसभा को हो, चाहे त्रिस्तरीय चुनाव हो, फायदे में हमेषा बीएलओ और तहसील वाले रहते है। जिस तरह फर्जी वोट बनाने का टारगेट प्रधानों का होता है, उसी तरह बीएलओ और तहसील वालों का भी पैसा कमाने का होता। अब तक जो देखा गया, उसमें दोनों अपने मकसद में सफल रहे। पूरी चुनाव व्यवस्था फर्जी वोटर्स के चलते तहस नहस हो जाती है। लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद तक चिल्लाने लगे कि भारी संख्या में फर्जी वोटर्स ने वोट डाले, जिसके चलते चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ। कोई यह न माने कि फर्जी वोट बनाने में सत्ता के लोग ही माहिर होते है। इनसे अधिक विपक्ष के लोग फर्जी वोट बनवाने में सफल होते है।

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