ठंडक’ में ‘सुबह’ के ‘तनाव’ से ‘बचे’, नहीं तो ‘फट’ जाएगी ‘नसंे’

ठंडक’ में ‘सुबह’ के ‘तनाव’ से ‘बचे’, नहीं तो ‘फट’ जाएगी ‘नसंे’

ठंडक’ में ‘सुबह’ के ‘तनाव’ से ‘बचे’, नहीं तो ‘फट’ जाएगी ‘नसंे’

  • -ठंडी हवा, धूप की कमी, रजाई में दुबके रहने से और कम शारीरिक श्रम  के कारण ठण्ड में बीमार होने का खतरा बढ़ताः डा. वी.के. वर्मा

बस्ती। ठंडक में लोगों को सुबह के समय तनाव से बचना चाहिए, नहीं तो नष के फटने की संभावना अधिक रहती है। यह कहना है, जिला चिकित्सालय में आयुष चिकित्साधिकारी एवं वरिष्ठ समाजसेवी तथा कई शैक्षणिक संस्थानों के संस्थापक साहित्यिक कवि ख्याति लब्ध तमाम पुरस्कारों से पुरस्कृत डा.वी.के. वर्मा का कहना है। ठण्ड के मौसम पर हुई बातचीत में उन्होंने तमाम सावधानियां तथा ठण्डक में रोजमर्रा के आहार से सुरक्षित रहने के उपाय साझा करते हुए कहते हैं, कि सर्दि‍यों के मौसम में कमजोर इम्‍यूनि‍टी का खतरा बना रहता है। जैसे-जैसे दिसंबर में तापमान गिरिता है, वायरल इंफेक्‍शन, फ्लू, सर्दी-जुकाम और थकान जैसी समस्‍याएं बढ़ने लगती हैं। ठण्डी हवा, धूप की कमी, ज्‍यादातर समय रजई में दुबके रहने से और कम शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍यों के कारण ठण्ड में बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ आसान उपायों की मदद से दि‍संबर की हाड़ कंपकपाती ठण्ड और कमजोर प्रतिरोधी क्षमता से बचा सकता है।

कहते हैं, कि विटामिन-डी के लिए प्रतिदिन सुबह 15 से 20 मिनट धूप में बैठना चाहिए, इससे प्रतिरोधी कोशिकाएं सक्रिय बनी रहती हैं। अदरक, हल्दी, लहसुन और आंवला जैसे खाद्य पदार्थों से प्रतिरक्षा बढ़ाएं, भरपूर पानी (गर्म पानी भी) पिएं, तिल का तेल और गुड़ का सेवन करें, भोजन दिन में दो बार तक सीमित करें, और हल्के शारीरिक व्यायाम करते रहें, साथ ही पर्याप्त नींद लें और हाथों की सफाई पर ध्यान दें, ताकि ठण्ड में बीमारियों से बच सकें एवं ऊर्जावान बने रहा जा सके। विटामिन-सी के लिए भरपूर फलों का सेवन करें फल खाने से सर्दी-खांसी होने की संभावना कम होती है, लेकि‍न रात को खट्टे फल खाने से बचें।

आहार और पोषण सुबह की गुनगुनी धूप लें अदरक, लहसुन, हल्दी और आंवला अपने खाने में शामिल करें, खूब पानी पिएं या गर्म नींबू पानी से दिन की शुरुआत करें गाजर, संतरा और अन्य मौसमी फल-सब्जियां खाएं भोजन पश्चात तिल चबाएं और खाड(गुड़) खाएं घर के बने तिल के लड्डू खाएं। खीर, पूड़ी, राजमा, पनीर जैसे भारी भोजन दिन में दो बार तक सीमित रखें, सर्दि‍यों में शरीर को स्‍वस्थ रखने के लिए आंवला का सेवन करें, आंवला में विटामिन-सी एवं एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स जैसे गुण पाए जाते हैं। यह शरीर को वायरल इंफेक्‍शन, फ्री-रेड‍िकल डैमेज और मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है। सुबह खाली पेट आंवला खाना बहुत असरदार माना जाता है। यदि आहार एवं विहार दिनचर्या में शामिल करेंगे तो शरीर चुस्त रहेगा किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या आती है तो नजदीकी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर तुरंत उपचार लेना आवश्यक है।

कहते हैं, कि ठण्ड में खून गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है, जिससे रक्त वाहिकाओं में थक्के जम जाते हैं। जब खून इन वाहिकाओं से होकर नहीं गुजर पाता, तो स्ट्रोक और लकवा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। सूर्योदय के बाद सुबह में जरा संभलकर रहें और हर छोटी-बड़ी बात पर तनाव न लें। वरना सुबह का तनाव मस्तिष्क पर भारी पड़ सकता है और जिसके चलते दबाव में दिमाग की नसें फट सकती हैं। सुबह छह बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक का वक्त बेहद संवेदनशील होता है। इस वक्त ही पक्षाघात का अटैक अधिक होता है। इस समयावधि में ही मरीज पक्षाघात से पीड़ित होते हैं। इस अवधि के दौरान पक्षाघात सेहत के लिए अधिक घातक साबित होता है।

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