भ्रष्टाचार’ में ‘बहादुरपुर’ बना नंबर वन ‘ब्लॉक’

भ्रष्टाचार’ में ‘बहादुरपुर’ बना नंबर वन ‘ब्लॉक’

भ्रष्टाचार’ में ‘बहादुरपुर’ बना नंबर वन ‘ब्लॉक’

बस्ती। जिस बहादुरपुर ब्लॉक को तीन-तीन नकली प्रमुख संचालन करेगें उस ब्लॉक को नंबर वन बनने से कौन रोक पाएगा? कभी नंबर वन का खिताब एक और नकली प्रमुख वाले ब्लॉक बनकटी के नाम रहा। इस ब्लॉक ने मनरेगा में 24-25 में 56 करोड़ से अधिक खर्च कर पूरे देश में एक नया रिकार्ड बनाया था, इस बार यह रिकार्ड नकली प्रमुखों से भरमार बहादुरपुर 25-26 में बनाने जा रहा है। 17 दिसंबर 25 तक यह ब्लॉक मनरेगा में 25.95 करोड़ खर्च कर चुका, इसमें 17.28 करोड़ अकुशल श्रमिकों पर, एक करोड़ 31 लाख कुशल श्रमिकों पर और छह करोड़ 55 लाख मटेरिएल पर खर्च किया। इस ब्लॉक में 24-25 में 41.43 करोड़ और 25-26 सहित कुल लगभग 68 करोड़ खर्च हो चुका, लेकिन जानकर हैरानी होगी कि एक भी ग्राम पंचायत माडल नहीं बना, यानि जो 68 करोड़ खर्च हुआ, अगर उसमें से 50 फीसद भी ग्राम पंचायतों के विकास पर खर्च कर दिया होता तो ब्लॉक के आधे से अधिक ग्राम पंचायतें माडल बन गई होती। जिन लोगों का मकसद ही भ्रष्टाचार कर अधिक से अधिक धन कमाने का रहता है, वह विकास और समाज के बारे में नहीं सोच सकता। यह ऐसे लोग जो सिर्फ किसी और के नाम पर पैसा कमाना जानते हैं, यही लोग हैं, जिन्होंने हरीश द्विवेदी हरा दिया। अगर यह लोग भ्रष्टाचार न करते तो कोई हरा नहीं सकता था, वैसे भी कहा जाता है, कि जिस टीम में केके दूबे जैसे खिलाड़ी होते हैं, उस टीम का मुखिया कभी जीत ही नहीं सकता। टीम के मुखिया को तीनों नकली प्रमुखों से क्या मिला उसे किसी ने नहीं देखा, लेकिन जो गंवाया उसे सभी ने देखा।

मनरेगा में बनकटी का नंबर दो पर पीेछे रहना चिंता और चर्चा का विषय है। पहली बार यह ब्लॉक नंबर दो आया, इससे पहले अब तक नंबर व नही रहा। कहां यह ब्लॉक 24-25 में 56.29 करोड़ खर्च किया था, कहां यह ब्लॉक अब तक मात्र 23.57 करोड़ में ही आकर सिमट गया। यह ब्लॉक भी दो साल में 80 करोड़ खर्च करके एक भी ग्राम पंचायत को माडल नहीं बना पाया। इस ब्लॉक की असली प्रमुख को क्या मिला? उसे अभी तक लोगों ने नहीं देखा। अब तीसरे नंबर पर रहने वाले नकली प्रमुख वाले ब्लॉक परसरामपुर का हाल जान लीजिए। ताज्जुब होता है, जिस ब्लॉक ने 24-25 में लगभग 50 करोड़ खर्च किया, वह ब्लॉक 23.33 करोड़ पर आ गया। दोनों सालों का मिला दिया जाए तो लगभग 73 करोड़ खर्च और एक भी ग्राम पंचायत माडल नहीं बन पाया। कुदरहा जो कभी नंबर वन हुआ था, वह अब चौथे स्थान पर आ गया। 24-25 में 43 करोड़ से अधिक खर्च करने वाले इस असली प्रमुख वाले ब्लॉक का स्तर इतना नीचे गिर जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। यह ब्लॉक मात्र 21.92 करोड़ पर सिमट गया। 62 करोड़ खर्च करने वाले इस ब्लॉक भी एक भी ग्राम पंचायत माडल नहीं बन पाया। पांचवें स्थान पर एक और नकली प्रमुख वाला ब्लॉक हर्रैया है। पिछले साल 35 करोड़ खर्च किया था, और इस साल 19.12 करोड़। कुल 54 करोड़ खर्च किया फिर भी एक भी गांव को माडल नहीं बना पाए। यही हाल छठें स्थान पर रहने वाले नकली प्रमुख वाले ब्लॉक गौर का भी है। 24-25 में  38.36 करोड़ और 25-26 में 16.81 करोड़, कुल 55 करोड़, फिर भी गांव माडल नहीं बना। सातवें स्थान पर रहने वाले नकली प्रमुख वाला ब्लॉक कप्तानंगज की भी यही कहानी है। 24-25 में 25.86 करोड़ ओर 25-26 में 16.29 करोड़ कुल 42 करोड़, फिर भी नहीं बना एक भी गांव माडल। सबसे खराब हालत असली प्रमुख वाले ब्लॉकों की है। यह असली होकर भी वह नहीं कर पा रहे हैं, जो नकली प्रमुख कर दे रहें है। पैसा भी सबसे अधिक नकली प्रमुखों ने ही कमाया। फिर असली होने से क्या लाभ? असली वालों का पैसा न कमा पाने का कारण असली प्रमुख होना, इन्हें हमेशा इस बात का डर रहता है, कि बदनामी तो उन्हीं की होगी, और अगले चुनाव में हो सकता है, फिर से जनता के पास जाना पड़े। इन्हें लोकलाज और समाज का भी डर रहता है, कार्रवाई होने का भी इन्हें खतरा रहता है। अगर इन्हें डर न होता तो सदर ब्लॉक मात्र 7.77 करोड़ खर्च करके 14वें यानि अंतिम स्थान पर नहीं रहते। यही हाल साउंघाट का भी है। 8.09 करोड़ खर्च किया। रुधौली 14.17 करोड़ के साथ नौवें स्थान, रामनगर 12.28 करोड़ खर्च करके 10वें स्थान पर है। सल्टौआ ने 10.86 करोड़ खर्च किया। रही बात नकली प्रमुखों की तो इन्हें न तो समाज और न बदनामी का डर, चुनाव में भी इन्हें नहीं जाना रहता। इसी लिए यह लोग बेखौफ होकर भ्रष्टाचार करते है।

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