अपमान ‘हरीश द्विवेदी’ का नहीं ‘संजय चौधरी’ का ‘हुआ’
- Posted By: Tejyug News LIVE
- राज्य
- Updated: 10 January, 2026 19:54
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अपमान ‘हरीश द्विवेदी’ का नहीं ‘संजय चौधरी’ का ‘हुआ’
बस्ती। नवागत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पहले गोरखपुर के प्रथम आगमन और दूसरा बनारस के प्रथम आगमन पर जो स्वागत हुआ, उसमंे भारी अंतर देखने को मिला। गोरखपुर और बनारस के स्वागत को देखकर कहा जा सकता कि बस्ती वालों ने बाजी मार ली। षानदार और जानदार स्वागत पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी की अगुवाई में गोरखपुर में बस्ती के अंसख्य भाजपाईयों ने किया। जितना जिंदाबाद का नारा पंकज चौधरी का लगा, उतना ही हरीश द्विवेदी का भी लगा। पंकज चौधरी ने हरीश द्विवेदी को पूरा सम्मान भी दिया, यह कहना गलत हैं, कि पंकज ने हरीश का माला ठुकराकर उनका अपमान किया। जिस किसी ने भी वीडियो को ध्यान से देखा होगा, और कई बार देखा होगा, वह कभी नहीं कहेगें, कि हरीशजी का अपमान हुआ। जिंदाबाद का नारा लगाकर पंकजजी के वाहन के साथ भीड़ में जब हरीशजी पैदल चल रहे थे, तब पंकजजी ने बाउंसर को हरीशजी को वाहन में बुलाने का ईशारा किया, वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है, कि बाउंसर हरीशजी को पकड़कर उपर खींच रहे हैंे, लेकिन भीड़ इतनी अधिाक थी, कि चाहकर भी बांउसर हरीशजी को पंकजजी के पास नहीं ले जा पाए। माला भी इस लिए नहीं पहना पाए, क्यों कि माला इतना वजनी था, कि अगर वह पंकजजी के गले में चला जाता तो शायद पंकजजी उसके वजन को सहन नहीं कर पाते। जो लोग अपमान करने की बात कह रहें, उन्हें बनारस के स्वागत का वीडियो अवष्य देखना। इस वीडियो को किसी को बार-बार देखने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी, वीडियो देखते ही उन्हें लग जाएगा, कि गोरखपुर में अपमान हरीशजी का नहीं बल्कि बनारस में असल अपमान तो पंकजजी को अपना करीबी बताने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी का हुआ। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है, कि जो स्वागत का मंच बना था, उसके नीचे देर तक स्वागत करने वालों को निराश संजय चौधरी खड़े देख रहें। वहां पर पंकजजी के साथ संजय चौधरी का जिंदाबाद का नारा लगाने वाला भी कोई नहीं था, जब कि गोरखपुर जैसी भीड़ भी नहीं थी। मंच से पंकज चौधरी, संजय चौधरी को देख भी रहे है। चाहते तो हरीश द्विवेदी की तरह संजय चौधरी को भी अपने पास बुला सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्यों नहीं हुआ? यह सोचने का विषय संजय चौधरी का है। किसी को अपने आप को पहचानने का इससे बड़ा कोई इवेंट हो ही नहीं सकता। इसके बाद भी अगर कोई यह दावा करें, कि वह प्रदेष अध्यक्ष के सबसे करीबियों में से हैं, तो वह खुद को तो धोखा दे ही रहें हैं, साथ ही उन अपनों को भी धोखा दे रहे हैं, जो यह समझते हैं, कि अध्यक्षजी प्रदेश अध्यक्ष के करीबी है। हरीशजी के अनेक शुभचिंतकों का कहना है, कि हरीश द्विवेदी को स्वागत करने के लिए गोरखपुर नहीं जाना चाहिए था, क्यों कि हरीशजी का स्तर बहुत उंचा है। हां अगर बस्ती में प्रथम आगमन होता तो वह अलग बात थी। यह अलग बात है, कि वह केंद्र में मंत्री और ़प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन पाए, लेकिन उनका राजनैतिक स्तर किसी नेशनल लीडर से कम नहीं है। कहते हैं, कि इन्हें किसी के सामने अपनी ताकत दिखाने की भी कोई आवष्यकता नहीं है।

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