‘सुबह’ की ‘सर्दी’ से ‘बचे’, नहीं ‘तो’ मार देगा ‘लकवा’
- Posted By: Tejyug News LIVE
- हेल्थ
- Updated: 3 January, 2026 20:03
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‘सुबह’ की ‘सर्दी’ से ‘बचे’, नहीं ‘तो’ मार देगा ‘लकवा’
बस्ती। जाने माने समाज सेवी एवं होम्योपैथ के विषेषज्ञ डा. वीके वर्मा का कहना है, कि सर्दी के दिनों में सबसे अधिक लकवा, पक्षाघात या (पैरालिसिस) के अटैक होने का खतरा रहता है। सबसे अधिक लकवा का अटैक सुबह की सर्दी में होता है। इसी लिए उन लोगों को सलाह दी जाती है, कि सुबह की सर्दी में किसी तरह की लापरवाही न करें, यहां तक मार्निगं वाक से भी लोगों को बचना चाहिए। कहते हैं, कि जितने भी लकवाग्रस्त मरीज आ रहे हैं, उन पर उनमें 99 फीसद सुबह के सर्दी के समय अटैक हुआ। कहते हैं, कि खराब लाइफस्टाइल, खान पान की बदलती आदतें और तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी बीमारियों का सबसे प्रमुख कारण है। लकवा, पक्षाघात या (पैरालिसिस) एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में पहले लोगों को पता नहीं चलता है, और अचानक से परेशानी हो जाती है। लकवाग्रस्त मरीजों का सफल इलाज हो सकता है, और किया भी जा चुका है।
कहते हैं, कि लकवा एक वायु रोग है, जिसे पैरालिसिस, लकवा और पक्षाघात के नाम से भी जानते हैं। इसमें मांसपेशियों की कार्यविधि प्रभावित हो जाती है। मस्तिष्क् से अंगों में संदेश पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं और रीढ़ की हड्डी प्रभावित होने की स्थिति में लकवा होता है। लकवा किसी एक मांसपेशी या समूह या शरीर के बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव ये होता है कि शरीर के किसी एक भाग की मांसपेशियां काम करनी बंद कर देती है। यानी ऐसी अवस्था में लकवा से ग्रस्त व्यक्ति एक से ज्यादा मांसपेशियों को हिलाने में असमर्थ होता है। यह स्थिति तब आती है, जब मांसपेशियों और मस्तिष्क के बीच संचार सही से नहीं हो पाता है। लकवा शरीर के एक क्षेत्र में या पूरे शरीर में हो सकता है यानी शरीर के एक तरफ या दोनों तरफ हो सकता है।
मोनोप्लेजिया, इस प्रकार के लकवे में शरीर का केवल एक अंग प्रभावित होता है। हेमीप्लेजिया इस पेरालिसिस में शरीर के एक तरफ का हाथ और पैर लकवाग्रस्त होते हैं। पैराप्लेजिया कमर से नीचे के अंग लकवाग्रस्त होने को पैरापलेजिया लकवा कहा जाता है। इस रोगी के दोनों पैर प्रभावित होते हैं। सामान्यतौर पर लकवा के लक्षण को पहचानना बहुत आसान होता है। ऐसे में मरीज को किसी विशिष्ट भाग में कुछ भी महसूस होना बंद हो जाता है। कई बार अंग में पैरालिसिस होने से पहले झुनझुनी या सुन्नता जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पैरालिसिस में शरीर का तकवा ग्रस्त हिस्सों की मांसपेशियों पर कंट्रोल खत्म हो जाता है। लकवा के दौरान आपको निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल सकते हैं। कभी-कभी मांसपेशियों में ऐठन व दर्द होना, मांसपेशियों में कमजोरी होना, मुंह से लार गिरना,. सिर दर्द, सोचने-समझने की क्षमता में कमी, चेहरे के एक साइड के हिस्से में कमजोरी होना, देखने और सुनने की क्षमता में बदलाव मूड और व्यवहार में बदलाव होना, सांस लेने में परेशानी आदि इसके लक्षण हैं।
ऐसे कई संभावित कारण है, जिनकी वजह से किसी व्यक्ति का शरीर परमानेंट या टेंपरेरी रूप से लकवा ग्रस्त हो सकता है। कई मामलों में यह रीढ की हड्डी में चोट या नुकसान के कारण होता है। इसके अलावा निम्नलिखित कारण है, जिनके कारण लकवा हो जाता है। जैसे किसी तरह का अटेक या स्ट्रोक, पोलियो, हड्डी, पीठ या सिर में गहरी चोट, ट्रामा, मल्टीपल स्केलरोसिस, शरीर के एक हिस्से में, हांथ या हाथ-पैर दोनों में कमजोरी महसूस होना। . लकवा के कुछ निम्नलिखित घरेलू उपाय है, जिसे आप घर पर आसानी से कर सकते हैं। दवाओं और इलाज के माध्यम से लकवा को नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है। गिली मिट्टी का लेपः गिली मिट्टी का लेप पैरालिसिस में बहुत उपयोगी माना जाता है। आप नियमित रूप से लकवा रोगियों में गिली मिट्टी का लेप लगा सकते हैं। यदि आप इसे रोजाना कर सकते हैं तो एक दिन का गैप ले सकते हैं। मिट्टी का लेप लगाने के बाद मरीज को कटीस्नान करना जरूरी होता है। यह उपाय लकवा मरीज के लिए बहुत लाभकारी साबित होता है। लकवा से ग्रसित अंगों में ऑयल लगाने के लिए आपको एक तरह का तेल तैयार करना होगा। इसके लिए आप आधा लीटर सरसों का तेल लें और उसमें 50 ग्राम लहसुन डालें। उसके बाद लोहे की कड़ाही में उसे तब तक पकाएं, जब तक की पानी जल न जाए। उसके बाद उसे ठंडा होने दे और ठंडा होने के बाद डिब्बे में छान कर रख लें। इस तेल से आप रोजाना लकवे वाले अंग पर मालिश करें, इससे आपको फायदा मिलेगा। करेला पैरालिसिस में करेला बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में मरीज को करेले की सब्जी या करेले का जूस का सेवन करना चाहिए। यह आपके शरीर के प्रभावित अंगों में सुधार करता है। यह जरूर ध्यान रखें की इस घरेलू उपाय को रोजाना करना होगा, इससे आपको जल्दी आराम मिल सकता है।

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