‘राम’ की ‘नगरी’ को भी ‘घोटालेबाजों’ ने नहीं ‘छोडा’़!

‘राम’ की ‘नगरी’ को भी ‘घोटालेबाजों’ ने नहीं ‘छोडा’़!

‘राम’ की ‘नगरी’ को भी ‘घोटालेबाजों’ ने नहीं ‘छोडा’़!

बस्ती

  • -‘गोरखपुर’ और ‘बस्ती’ में हुआ ‘छह-छह’ करोड़ का ‘घोटाला’

बस्ती। प्रदेश का कोई भी ऐसा जिला नहीं जो घोटाले में शामिल न हो। हैरानी होती है, कि इतना बड़ा घोटाला हो जाता है, और जिम्मेदारों की जानकारी में होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। लोगों को सबसे अधिक हैरानी जीरो टालरेंस नीति का ढ़ोलक बजाने वाले सीएम और उनकी टीम पर होती है। उससे अधिक हैरानी विपक्ष के नेताओं की चुप्पी देख करन हो रही है, ऐसा लगता है, कि मानो अगर विपक्ष ने मुंह खोल दिया, उनके घरों और प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चल जाएगा। अधिकारियों और नेताओं के संज्ञान में यह मामला पिछले चार साल से हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जीरो। घोटाले को उजागर करने वाले गोरखपुर के संजय मिश्र कहते हैं, कि बात जीरो टालरेंस की मगर भ्रष्टाचार 100 फीसद। जिन जिलों में प्रशासक और सचिवों ने ग्राम निधि के धन को लूटा, उनमें आगरा में 12 करोड़, अलीगढ़ में आठ करोड़, अंबंडकरनगर में 10 करोड़, बमेठी में नौ करोड़, अमरोहा में दो करोड़, औरैया में छह करोड़, अयोध्या में 11 करोड़, आजमगढ़ में 13 करोड़, बागपत में छह करोड़, बहराइच में 21 करोड़, बलिया में 13 करोड़, बलरामकपुर में आठ करोड़, बांदा में 20 करोड़, बाराबंकी में 14 करोड़, बरेली में पांच करोड़, बस्ती में छह करोड़, बिजनौर में सबसे अधिक 27 करोड़, बदायूं में नौ करोड़, बुलंदशहर में 18 करोड़, चंदौली में सात करोड़, चित्रकूट में आठ करोड़, एटा में छह करोड़, इटावा में पांच करोड़, फर्रुखाबाद में छह करोड़, फतेहपुर में 17 करोड़, फिरोजाबाद में 12 करोड़, गौतमबुद्धनगर में एक करोड़, गाजीपुर में पांच करोड़, गोंडा में सात करोड़, गोरखपुर में छह करोड़, हमीरपुर में पांच करोड़, हापुड़ में दो करोड़, हरदोई में 11 करोड़, हाथरस में सात करोड़, जालौन में 12 करोड़, जौनपुर में 20 करोड़, झांसी में 12 करोड़, कन्नपौज में दो करोड़, कानपुर देहात में पांच करोड़, कासगंज में 10 करोड़, कौशंबी में पांच करोड़, खीरी में 11 करोड़, कुशीनगर में 18 करोड़, ललितपुर में छह करोड़, लखनउ में पांच करोड़, महराजगंज में पांच करोड़, महोबा में सात करोड़, मैनपुरी में चार करोड़, मथुरा में 12 करोड़, म उमें दो करोड़, मेरठ में तीन करोड़, मिर्जापुर में आठ करोड़, मुरादाबाद में नौ करोड़, मुज्जफरनगर में 15 करोड़, पीलीभीत में नौ करोड़, प्रतापगढ़ में 13 करोड़, प्रयागराज में 12 करोड़, रायबरेली में पांच करोड़, सहारनपुर में 14 करोड़, संभल में आठ करोड़, संतबकीरनगर में चार करोड़, संतरविदासनगर में तीन करोड़, शाहजहांपुर में चार करोड़, शामली में पांच करोड़, श्रावस्ती में चार करोड़, सिद्धार्थनगर में नौ करोड़, सीतापुर में 18 करोड़, सोनभद्र में आठ करोड़, सुल्तानपुर में 121 करोड़, उन्नाव में आठ करोड़, वाराणसी में चार करोड़ और देवरिया में 11 करोड़ सहित कुल 650 करोड़ का घोटाला भाजपा के कार्यकाल में हुआ।

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