‘ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’

‘ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’

‘ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’

बस्ती। बीडीए के तत्कालीन जेई अनिल कुमार त्यागी को जहां उनके ईमानदारी के लिए याद किया जाएगा, वहीं तत्कालीन एक्सईएन पंकज पांडेय को उनकी बेईमानी के लिए जाना जाएगा। एक ही विभाग के दो अधिकारी, एक ने ईमानदारी का मिसाल प्रस्तुत किया, तो दूसरे ने भ्रष्टाचार के नए मापदंड स्थापित किया। भ्रष्ट एक्सईएन को जहां नोटें मिली, वहीं ईमानदार जेई को चोटें। ईमानदार जेई जहां अपने साथ चोटों का जख्म लेकर गए, वहीं भ्रष्ट एक्सईएन नोटों के बंडल के साथ गए। ईमानदार जेई की कोई बिदाई नहीं हुई, और भ्रष्ट एक्सइएन को फूल माला पहनाकर बिदाई दी गई। यह है, बीडीए के भ्रष्ट एक्सईएन और ईमानदार जेई के बीच का अंतर। एक भी अवैध निर्माण करने वाले ने जेई की ईमानदारी को नहीं सराहा, वहीें भ्रष्ट एक्सईएन को न सिर्फ पल्कों पर बैठाया, बल्कि नोटों की गडडी से भी नवाजा। जेई को जहां उनकी ईमानदारी की सजा जांच के रुप में मिली, वहीं बेईमान एक्सईएन को प्रमोशन मिला। बीडीए के लोग ईमानदार जेई को नहीं बल्कि बेईमान एक्सइएन को बहुत याद करते। ईमानदार जेई चिल्लाता रहा कि उसके उपर तीन बार कार्यालय के लोगों ने एक्सईएन के शह पर हमला किया। खुद तो हमला किया ही साथ ही अवैध निर्माण करने वालों से भी करवाया। जेई को रास्ते से हटाने तक कि सुपारी दी गई। इस हमले में कभी उनके कान के पर्दे फट गए, तो कभी हाथ ने काम करना बंद कर दिया, छह माह तक इलाज करवाते रहे, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ्य नहीं हो पाए। हमले की जानकारी प्रमुख सचिव, उपाध्यक्ष, सचिव, एक्सईएन और पुलिस से भी की, लेकिन किसी ने भी इनके कराहने की आवाज नहीं सुनी, यहां तक हमला करने वाले पांच मेंटो का नाम भी दिया, लेकिन उन्हें हटाने को कौन कहे, नोटिस तक जारी नहीं किया। कार्रवाई न होने के मामले में भाजपा के एक बड़े नेता का हाथ बताया जाता, इस नेता का नाम भी रिपोर्ट में शामिल है। अपने आप को ईमानदार कहने वाले बीडीए के एक भी सदस्य ने ईमानदार जेई का साथ नहीं दिया। साथ देना तो दूर की बात, बैठकों में आवाज तक नहीं उठाया। अगर यह लोग ईमानदार होते तो इन्हें आवाज उठानी चाहिए थी, इंसाफ का तकाजा तो यही था, इन्हें कम से कम जांच के लिए तो लिखना ही चाहिए। अगर तीन लोग मिलकर बीडीए के भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा सकते, तो इनके रहने और न रहने का कोई मतलब नहीं। जब भी कोई सदस्य भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता, दूसरे दिन बीडीए वाले उसके आवास पहुंच जाते, उसके बाद न जाने क्यों आवाज उठाना बंद हो जाता है। अगर तत्कालीन एक्सईएन जिले को लूट कर गए तो इसके लिए बीडीए के तीनों सदस्य भी उतना जिम्मेदार और दोषी हैं, जितना अध्यक्ष, उपाध्याक्ष और सचिव।

अगर बीडीए में भ्रष्टाचार बढ़ा और तत्कालीन एक्सईएन पंकज पांडेय जैसे लोग नोटों से भरा ब्रीफकेश बस्ती से लेकर जाते हैं, तो उसमें सबसे बड़ा योगदान अवैध निर्माण करने वाले धन्ना सेठ है। एक तरह इन लोगों ने मिलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। तभी तो एक भ्रष्ट कहे जाने वाले जेई आरसी शुक्ल ने कहा था, अगर कोई नोटों का बंडल आफर करता है, तो उसे क्यों ठुकराया जाए? हैरान करने वाली बात यह रही है, कि धन्ना सेठों को अच्छी तरह मालूम था, कि लाखों देने के बाद भी उनका आवास, प्रतिष्ठान या फिर नर्सिगं होम कभी वैध नहीं हो सकता, फिर भी यह धन्ना सेठ बीडीए पर नोटों का बौझार इस लिए करते रहे कि ताकि उनका अवैध निर्माण किसी तरह पूरा हो जाए। एक भी धन्ना सेठ ने यह नहीं सोचा कि जब उनका मानचित्र स्वीकृति ही नही हो सकता और न कभी यह वैध हो सकता है, तो क्यों बीडीए वालों को मालामाल करें। जितने भी धन्ना सेठों ने पंकज पांडेय सहित अन्य भ्रष्ट बीडीए के लोगों पर नोटों का बौझार किया, उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं, जितना भी डिमांड बीडीए वालों ने किया, उससे अधिक यह कहकर दिया कि मेरे अवैध निर्माण में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए, और न नोटिस ही जारी होना चाहिए। अब जरा आप लोग अंदाजा लगाइए कि जब देने वाला नहीं चिल्ला रहा, तो लेने वाला क्यों परहेज करे? एक भी धन्ना सेठ ने इस बात की शिकायत नहीं किया कि बीडीए वाले उनसे नाजायज धन की मांग कर रहे है। मांगने से पहले ही धन्ना सेठ नोटों की गडडी लेकर पकंज पांडेय जैसे लोगों के पास पहुंच जाते थे। पंकज पांडेय एंड टीम ने सौ से अधिक धन्ना सेठों से षमन शुल्क लेकर इस लिए शमन मानचित्र स्वीकृति किया, कि जो भी अवैध निर्माण का पोर्सन हैं, उसे एक माह में ध्वस्त कर देगें, अपने बचाव के लिए सभी से शपथ पत्र भी लिया। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि सालों बीत गए, लेकिन एक भी अवैध निर्माण कर्त्ता ने उस पोर्सन को ध्वस्त नहीं किया और न ही बीडीए ही किया, जिसके लिए शपथ-पत्र दिया था। इन शपथ पत्रों के जरिए बीडीए के लोगों ने कम से कम 20 करोड़ कमाया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि 20 करोड़ और लगभग 25 करोड़ शमन शुल्क जमा करने के बाद भी धन्ना सेठों का प्रतिष्ठान वैध नहीं हुआ। इसी का जब जेई अनिल कुमार त्यागी ने विरोध किया, तो उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई, जिसमें अवैध निर्माणकर्त्ता भी शामिल रहे। अब जरा अंदाजा लगाइए कि अगर कोई ईमानदार अधिकारी जिले से इस लिए मार खाकर जाता है, कि उसने एक्सईएन पंकज पांडेय जैसे भ्रष्ट लोगों का विरोध किया, तो इससे जिले की छवि पर कितना खराब प्रभाव पड़ेगा, इसे आसानी से सोचा जा सकता है। श्रीत्यागी जेैसे लोग अवष्य जिले की बदनामी घूम-घूम कर करेगें, लेकिन पंकज पांडेय जैसे लोग यह अवष्य कहेगें कि जिला और जिले के लोग बहुत बढ़िया है। बस्ती के धन्ना सेठों ने पंकज पांडेय जैसे भ्रष्ट लोगों को मालामाल करके एक तरह खुद के भ्रष्ट होने का सबूत पेश किया।    

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